
भारत-पाक सुलह: रुपये की जबरदस्त वापसी!
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हालिया समझौते से शेयर बाज़ार और करेंसी बाज़ार में राहत की लहर दौड़ गई है। दोनों देशों ने जमीन, हवा और समुद्र, तीनों मोर्चों पर तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने का फ़ैसला किया है। इसका सीधा असर रुपये पर दिखा, जो अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले मज़बूत हुआ।
विदेशी निवेशकों का भरोसा: रुपये को मिला सहारा
विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाज़ारों की ओर बढ़ा है। सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ख़ूब शेयर खरीदे। इससे रुपये को मज़बूती मिली और बाज़ार को भी सहारा मिला। विदेशी निवेश बढ़ने से डॉलर की मांग कम होती है, जिससे रुपये की कीमत बढ़ती है। यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक माहौल है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद मोदी का संदेश: आतंक और बातचीत साथ नहीं चल सकते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद देश को संबोधित करते हुए साफ़ कहा कि भारत अब परमाणु धमकियों से नहीं डरता। उन्होंने दुनिया को संदेश दिया कि ‘आतंक और व्यापार या आतंक और बातचीत साथ नहीं चल सकते।’ मोदी जी ने कहा कि यह नया भारत है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आतंक के ख़िलाफ़ हमारी नई नीति और न्याय के लिए हमारे दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। हालांकि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कार्रवाई पर अभी रोक है, लेकिन भारत का अगला कदम पाकिस्तान के बर्ताव पर निर्भर करेगा।
डॉलर इंडेक्स और व्यापार समझौते का असर: अमेरिकी मुद्रा कमज़ोर
डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुक़ाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति दिखाता है, में गिरावट आई है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौते ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर लगे भारी टैक्स घटा दिए हैं। इससे दुनिया भर में आर्थिक उम्मीदें बढ़ी हैं और डॉलर की मांग कम हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, लेकिन भारत के लिए ख़तरा बरक़रार
ब्रेंट क्रूड की कीमत में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन अभी भी 65 डॉलर के आसपास है। अगर कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो भारत का व्यापार घाटा बढ़ सकता है क्योंकि भारत ज़्यादातर तेल आयात करता है। अगर कीमतें ऐसे ही रहीं, तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
डॉलर के मुक़ाबले रुपये में गिरावट की संभावना कम
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर-रुपया जोड़ी 84.50 से 85.10 के दायरे में रहेगी। इसका मतलब है कि निवेशकों को ज़्यादा उतार-चढ़ाव की उम्मीद नहीं है और बाज़ार में स्थिरता बनी रह सकती है।
सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट, लेकिन निवेशकों की नज़र लंबी अवधि पर
हालांकि रुपया मज़बूत हुआ, लेकिन शेयर बाज़ार में गिरावट आई। लेकिन बाज़ार के जानकार मानते हैं कि यह गिरावट अल्पकालिक है। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीददारी इस बात का संकेत है कि लंबी अवधि में भारत में विकास की संभावना मज़बूत बनी हुई है।



