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ओंकारेश्वर के फूलों से महकेंगे घर-मंदिर: आस्था, रोजगार और पर्यावरण का अनोखा संगम

ओंकारेश्वर का कमाल: फूलों से महकती अगरबत्तियाँ और महिलाओं की कामयाबी

परिचय: ओंकारेश्वर के भगवान भोलेनाथ के मंदिर में आने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में फूल चढ़ाते हैं। पहले ये फूल फेंक दिए जाते थे, लेकिन अब इनसे बन रही हैं खुशबूदार अगरबत्तियाँ, जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित है और महिलाओं को रोज़गार भी मिल रहा है।

फूलों से महकती अगरबत्तियाँ: एक नई शुरुआत

इस अनोखे काम से ना सिर्फ़ फूलों का सही इस्तेमाल हो रहा है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मज़बूत भी बनाया जा रहा है। ‘इको निर्मित पुष्पांजलि अगरबत्ती’ नाम से बन रही ये अगरबत्तियाँ देशभर में अपनी खुशबू फैला रही हैं।

क्विंटल भर फूलों का जादू

ओंकारेश्वर में रोज़ाना एक क्विंटल से ज़्यादा फूल चढ़ाए जाते हैं। कलेक्टर ऋषव गुप्ता के बढ़िया विचार से इन फूलों से अगरबत्ती, इत्र और धूप बन रही है।

महिला स्व-सहायता समूह की अहम भूमिका

शिवशक्ति स्व-सहायता समूह की महिलाएं इन फूलों को इकट्ठा करती हैं, साफ़ करती हैं, सुखाती हैं और फिर उनसे अगरबत्तियाँ बनाती हैं। ये पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हैं।

आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

यह पहल सिर्फ़ पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि महिलाओं की आत्मनिर्भरता का भी एक बेहतरीन उदाहरण है। मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन के सहयोग से ये महिलाएं आर्थिक रूप से मज़बूत बन रही हैं।

आमदनी में बढ़ोतरी: खुशहाली का नया रास्ता

‘पुष्पांजलि इको निर्मित’ संस्था महिलाओं को प्रशिक्षण, मशीनें और ज़रूरी सामान दे रही है। अगरबत्तियों के अलावा, महिलाएँ हवन सामग्री, जैविक खाद और प्राकृतिक रंग भी बना रही हैं, जिससे उनकी कमाई बढ़ रही है।

आस्था, पर्यावरण और रोज़गार का संगम

यह तरीका ना सिर्फ़ फूलों का सही इस्तेमाल करता है, बल्कि मां नर्मदा नदी को प्रदूषण से भी बचाता है। स्वच्छ भारत मिशन को भी इससे मदद मिल रही है।

ओंकारेश्वर: एक नई सोच का प्रतीक

कलेक्टर ऋषव गुप्ता के मुताबिक, ओंकारेश्वर अब सिर्फ़ एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि एक नई सोच का प्रतीक बन गया है। यहाँ की महिलाएँ समाज की नई शक्ति बनकर उभरी हैं।

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