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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में पहली बार प्रदान किए पर्यावास अधिकार मान्यता पत्र…..

र धान, लघु वनोपजों, मिलेट्स की खरीदी के साथ व्यक्तिगत, सामुदायिक वन अधिकार पत्र, सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार प्रदान किए गए हैं। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां वन अधिकार मान्यता पत्र के माध्यम से आदिवासियों और वनवासियों को दी गई जमीन की ऋण पुस्तिका बनाई गई है। ऋण पुस्तिका बनने से पट्टेधारियों के लिए समर्थन मूल्य पर कृषि और लघु वनोपजों तथा मिलेट्स उपज बेचना संभव हो रहा है। इसके साथ ही साथ उन्हें कृषि कार्यों के शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण भी उपलब्ध हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामुदायिक तथा वन संसाधन वन अधिकार मान्यता पत्र के माध्यम से लाखों हेक्टेयर जमीन वनवासियों को दी गई है। सामुदायिक तथा वन संसाधन मान्यता पत्र के माध्यम से मिले अधिकारों का उपयोग पट्टाधारी किस तरह कर सकें इसके लिए जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। इसके लिए आज वनाधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के संबंध में जागरूकता हेतु ग्राम सभाओं में जागरूकता अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान का प्रथम चरण वन अधिकार मान्यता पत्र की प्रक्रिया की जानकारी पर केन्द्रित था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अधिकारों के उपयोग के संबंध में जागरूकता लाने के लिए राज्य सरकार और समाजसेवी संगठनों द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनजाति समुदायों के समाज प्रमुखों से भी आग्रह किया कि वे इस काम को प्राथमिकता के साथ हाथ में लें, ताकि आदिवासियों को प्राप्त अधिकारों का वे अधिक से अधिक लाभ उठा सकें। यह प्रयास छत्तीसगढ़ को समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह को पर्यावास अधिकार की मान्यता देने की प्रक्रिया के संबंध में प्रकाशित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की योजनाओं की प्रगति से संबंधित पुस्तिका ‘समावेशी विकास के बढ़ते सोपान’ शीर्षक से प्रकाशित कॉफी टेबल बुक, आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा प्रकाशित पुस्तकों ‘छत्तीसगढ़ की जनजातीय वाचिक परम्पराएं’, ‘बस्तर दशहरा’ ‘आदिनाद जनजाति वाद्ययंत्र’ ‘स्मारिका’ का भी विमोचन किया।

आदिवासी जननायकों के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के गौरवपूर्ण स्मरण के रूप में डाक टिकट एवं विशेष आवरण जारी

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के आदिवासी जननायकों द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में किये गये योगदान के गौरवपूर्ण स्मरण के रूप में डाक टिकट एवं विशेष आवरण का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनजातियों के वाद्य यंत्रों पर आदिम जाति विकास विभाग द्वारा तैयार किए गए वृत चित्र का प्रदर्शन किया गया।

आदिम जाति तथा अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री श्री मोहन मरकाम ने इस अवसर पर कहा कि आज मगरलोड पाली के विशेष रूप से कमजोर जनजाति कमार समूह को राज्य में प्रथम पर्यावास अधिकार मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि चाहे लघुवनोपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की बात हो या धान की समर्थन मूल्य में खरीदी हो, मिलेट् का न्यूनतम समर्थन मूल्य हो, हमारी सरकार द्वारा जनजाति हितों को ध्यान में रखा गया है। विशेष पिछड़ी जनजाति समूह के युवाओं को नौकरी देने के बात हो, चाहे जनजाति क्षेत्रों में सुपोषण अभियान हो, मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना हो, आदिवासी परब सम्मान के माध्यम से अनुसूचित क्षेत्र के पंचायतों को सशक्त करना हो, हमारी सरकार और मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने जनजाति हितों को प्राथमिकता दी है।
प्रदेश में कमार जनजाति मुख्यतः चार जिलों गरियाबंद, महासमुंद, धमतरी एवं कांकेर में निवासरत है। इन सभी जिलों के कमार आवासीय क्षेत्रों को समेकित किए जाने पर उनका पर्यावास क्षेत्र निर्धारित होगा।
इस अवसर पर कलेक्टर धमतरी श्री ऋतुराज रघुवंशी, निदेशक, डाक सेवाएं छत्तीसगढ़ परिमंडल श्री दिनेश मिस्त्री, समाज सेवी सुश्री मंजीत कौर बल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल

मगरलोड-पाली के परिवारों को मिला पर्यावास अधिकार

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा प्रदेश में पहली बार धमतरी जिला के विकास खंड मगरलोड अंतर्गत 22 पीव्हीटीजी पाली के परिवारों के व्यक्तियों को पर्यावास अधिकार प्रदान किए गए हैं। इन अधिकारों के माध्यम से पीव्हीटीजी समुदाय के प्रथागत व्यवस्थाओं, संस्कृति के साथ पारम्परिक अधिकारों को शासकीय दस्तावेज में अभिलिखित करने तथा सुरक्षा, संरक्षण एवं संवर्धन में सहयोग मिलेगा। पीढ़ियों से चली आ रही पारम्परिक आजीविका और पारिस्थितिकी ज्ञान की सुरक्षा और संवर्धन हो सकेगा। विभिन्न विभागों की योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से शासन द्वारा इन क्षेत्रों का सशक्तिकरण और विकास किया जा सकेगा। पीव्हीटीजी विकास अभिकरण के माध्यम से समुदाय अनुकूल अधोसंरचना विकास में सहायता मिलेगी।

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