छत्तीसगढ़

नगर निगम रायपुर का बकाया अनिवार्य निधि देने प्रमोद दुबे ने नगरीय प्रशासन मंत्री साव को लिखा पत्र

रायपुर। रायपुर नगर निगम के पूर्व महापौर एवं वर्तमान अध्यक्ष प्रमोद दुबे ने नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव को पत्र लिखकर रायपुर नगर निगम को जो राशि अनिवार्य रूप से दिया जाना है, को शीघ्र जारी करने की मांग की है। दुबे  ने कहा है कि 2023-24 के बार लाइसेंस की राशि 11 करोड़ 42 लाख 2022-23 के मुद्रांक शुल्क की राशि 45 करोड़ 44 लाख पार्षद महापौर निधि का लगभग 4 करोड़ इस प्रकार लगभग 62 करोड़ की राशि जो जनवरी में प्राप्त हो जाना था अभी तक प्राप्त नहीं होने के कारण सभी विकास के कार्य ठप्प पड़ चुके हैं । चुनाव के पूर्व जो काम शुरू हुए थे उन्हें भी आधे बीच में रोक दिया गया है. दुबे ने कहा है कि चुनाव आचार संहिता 4 दिसंबर को खत्म होने के बाद भी 200 करोड़ की अधोसंरचना की राशि भी रोक दी गई है । नगर निगम के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी रकम को रोकना रायपुर की जनता के साथ अन्याय है।  इसके विपरीत जो 70 विकास कार्य जिसमें अति अनिवार्य कार्य मुख्य रूप से नालों के निर्माण तथा सड़कों से संबंधित है उनके टेंडर लग चुके थे तथा समिति द्वारा अप्रूवल भी हो चुका था उन सारे कार्यों को रोक दिया गया है। प्रमोद दुबे ने कहा है कि सामने बरसात का समय है भाठागांव जैसे मुख्य मार्ग में नाले नहीं होने के चलते 24 घंटे सड़क में पानी रहता है जो राजधानी को कलंकित करती है ।

प्रमोद दुबे ने कहा है कि निगम को जो राशि उनके हक अधिकार की है समय में नहीं मिलने के कारण  कार्य समय सीमा में नहीं हो पाता जिसके चलते प्रोजेक्ट कॉस्ट भी बढ़ जाते हैं इसके बारे में शासन में बैठे अधिकारी को भी कोई चिंता नहीं होती । दुबे ने नगरीय प्रशासन मंत्री से आग्रह किया है कि रायपुर राजधानी होने के कारण छोटे-छोटे कामों के लिए प्रतिदिन राशि की आवश्यकता होती है इन्हीं पैसों से देनंदिनी के कार्य किए जाते हैं। विगत तीन माह से इतनी बड़ी राशि रोके जाने के कारण देनंदिनी के कार्य नहीं हो पा रहे हैं,, ऊपर से आए दिन अधिकारियों के दौरे वार्डों में होते हैं जहां समस्या होती है वहां के समाधान हेतु और राशि नहीं होने के चलते जनप्रतिनिधियों को एवं अधिकारियों को कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है,,, अत: रायपुर नगर निगम की अनिवार्य राशि 62 करोड़ तथा अधो संरचना मध्य के 200 करोड़ की राशि को शीघ्र जारी कर विकास कार्यों की गति को जारी रखने की मांग की है। प्रमोद दुबे ने बताया कि इस संबंध में कई पत्र शासन को जा चुके हैं लेकिन उस पर कोई गंभीरता से निर्णय नहीं हो पा रहा है।

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