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रुपया फिर संभला: डॉलर के मुकाबले 12 पैसे मजबूत, जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

रुपये में उछाल: क्या है पूरा मामला?

पिछले हफ़्ते रुपये ने डॉलर के मुक़ाबले अच्छी तेज़ी दिखाई और 12 पैसे की बढ़त के साथ 85.42 पर पहुँच गया। लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी? चलिए, विस्तार से समझते हैं।

शानदार शुरुआत, फिर मामूली गिरावट

शुक्रवार को रुपये ने 85.28 से शुरुआत की, लेकिन बाद में थोड़ा कमज़ोर होकर 85.42 पर बंद हुआ। ये गुरुवार के मुक़ाबले 12 पैसे की बढ़त थी, जबकि गुरुवार को रुपया 22 पैसे गिरकर 85.54 पर बंद हुआ था। विदेशी निवेशकों की खरीदारी और डॉलर इंडेक्स में गिरावट ने शुरुआती मज़बूती में अहम भूमिका निभाई।

विदेशी निवेशकों का बड़ा दांव

गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 5,392.94 करोड़ रुपये की भारी खरीदारी की। इस बड़े निवेश से रुपये को मज़बूती मिली। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में निवेश करते हैं, तो उन्हें रुपये की ज़रूरत होती है, जिससे इसकी मांग बढ़ती है और कीमत में सुधार होता है।

डॉलर की कमज़ोरी और घरेलू बाजार की चिंता

डॉलर इंडेक्स में 0.24% की गिरावट के बावजूद, घरेलू शेयर बाजार में गिरावट ने रुपये की बढ़त पर रोक लगाई। सेंसेक्स में 252.97 अंकों और निफ्टी में 67.6 अंकों की गिरावट देखी गई। शेयर बाजार की कमज़ोरी से रुपये की मज़बूती प्रभावित होती है।

अमेरिका में ब्याज दरों का असर

डॉलर इंडेक्स की कमज़ोरी का एक कारण अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बदले हुए अनुमान हैं। नए आर्थिक आंकड़ों से संकेत मिल रहे हैं कि फेडरल रिजर्व इस साल तीन बार से ज़्यादा ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड घटकर 4.426% पर आ गई और डॉलर कमज़ोर हुआ।

कच्चे तेल की कीमतों का दबाव

ब्रेंट क्रूड की कीमत में 0.14% की मामूली बढ़ोतरी (64.62 डॉलर प्रति बैरल) ने रुपये पर दबाव बनाया। कच्चा तेल भारत का सबसे बड़ा आयात है, इसलिए इसकी कीमत में बढ़ोतरी रुपये को प्रभावित करती है।

अप्रैल में निर्यात में बढ़ोतरी, लेकिन व्यापार घाटा भी बढ़ा

अप्रैल में भारत का निर्यात 9.03% बढ़कर 38.49 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले छह महीनों में सबसे अधिक है। लेकिन व्यापार घाटा भी बढ़कर 26.42 अरब डॉलर हो गया, क्योंकि आयात में 19.12% की वृद्धि हुई।

विशेषज्ञों की राय

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के हेड ऑफ ट्रेजरी अनिल कुमार भंसाली का मानना है कि रुपया 85.25 से 85.75 के दायरे में रह सकता है। निर्यातक ऊपरी स्तर पर डॉलर बेचेंगे, जबकि आयातक थोड़ा इंतज़ार कर सकते हैं। उनका मानना है कि आरबीआई ने गुरुवार को 85.75 के स्तर पर हस्तक्षेप किया था।

सतर्कता बरतने की ज़रूरत

हालांकि रुपये में मज़बूती एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन घरेलू बाजार की कमज़ोरी और बढ़ता व्यापार घाटा भविष्य में फिर से दबाव बना सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है, और रुपये की आगे की चाल डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश पर निर्भर करेगी।

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