
भारत-पाक सीजफायर: परमाणु युद्ध का खतरा टला?
यह लेख भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हालिया सीजफायर पर केंद्रित है, जिसमें अमेरिका की भूमिका और परमाणु युद्ध की संभावना पर चर्चा की गई है।
परमाणु युद्ध की कगार पर?
हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बारे में चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर थी कि लाखों लोगों की जान जा सकती थी। लेकिन दोनों देशों के नेताओं ने समझदारी से काम लिया और स्थिति को बिगड़ने से रोका। ट्रम्प के बयान से साफ है कि परमाणु युद्ध का खतरा वास्तव में मँडरा रहा था।
पाकिस्तान के परमाणु हथियार: चिंता का विषय
अमेरिका को पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के नियंत्रण को लेकर गंभीर चिंता है। ऐसी आशंका है कि इन हथियारों पर अब सेना का ही नियंत्रण है, और यह चिंता कई वर्षों से अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय कमान प्राधिकरण की बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया, जिससे अमेरिका की चिंता और बढ़ गई है।
पहलगाम हमला और जवाबी कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया। इस हमले में कई निर्दोष नागरिक मारे गए। भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और जवाबी कार्रवाई की। इससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया, जिसके बाद सीजफायर की घोषणा हुई।
अमेरिका की भूमिका: बैकडोर डिप्लोमेसी
ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इसे एक बहादुरी भरा कदम बताया जिससे दोनों देशों का भविष्य सुरक्षित हुआ। हालांकि, भारत ने हमेशा कश्मीर मुद्दे को अपने आंतरिक मामला माना है और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता।
व्यापारिक रणनीति: सीजफायर के बाद
ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ व्यापार बढ़ाने जा रहा है। यह संकेत देता है कि अमेरिका इस सीजफायर को केवल शांति की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी देख रहा है। यह व्यापारिक समझौता सीजफायर को और मजबूत कर सकता है।



