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लोकसभा में वक्फ बिल पर गरमाएगी सियासत, कांग्रेस का तीन दिन का सख्त रुख

वक्फ संशोधन बिल पर घमासान: विपक्ष ने बताया असंवैधानिक, सरकार ने दी सफाई

केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश करने जा रही है, जिसे लेकर सियासी घमासान मच गया है। कांग्रेस ने तीन दिनों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है, जिससे यह साफ है कि विपक्ष इस पर कड़ा रुख अपनाने वाला है। विपक्ष और सत्ता पक्ष में टकराव के आसार अल्पसंख्यक मामलों और संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बताया कि लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में 8 घंटे की बहस तय की गई है, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है। इस बैठक में स्पीकर ओम बिड़ला की अध्यक्षता में सभी प्रमुख दलों के नेता मौजूद थे। हालांकि, इस दौरान माहौल गर्म हो गया जब कांग्रेस और INDIA गठबंधन के कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है और वे बैठक से वॉकआउट कर गए।

संख्याबल में भारी NDA, विपक्ष की मांगें अनसुनी? कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज कर रही है। विपक्ष चाहता था कि मणिपुर के हालात और मतदाता पहचान पत्र से जुड़े विवाद सहित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हो। उन्होंने कहा, “हम चाहते थे कि बहस का समय 12 घंटे किया जाए, लेकिन सरकार जबरदस्ती अपनी बात थोप रही है।” दूसरी ओर, रिजिजू ने कहा कि अधिकतर दल 4 से 6 घंटे की बहस चाहते थे, जबकि विपक्ष 12 घंटे मांग रहा था। हालांकि, तय समय 8 घंटे है और इसे आगे बढ़ाने का विकल्प खुला है।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जताई आपत्ति AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल को “असंवैधानिक” बताते हुए कहा कि यह मुसलमानों की धार्मिक आज़ादी पर हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने सहयोगी दलों तेलुगू देशम पार्टी (TDP) और जदयू (JDU) के जरिए इस बिल को पास करवाना चाहती है, लेकिन जनता उन्हें सबक सिखाएगी। NDA को लोकसभा में मजबूत समर्थन वर्तमान में लोकसभा में कुल 542 सांसद हैं, जिनमें NDA के 293 सांसद हैं। भाजपा के पास स्वतंत्र सांसदों और छोटे दलों का समर्थन भी है, जिससे विपक्ष के विरोध के बावजूद बिल पास होने की संभावना प्रबल है। हालांकि, राज्यसभा में समीकरण थोड़ा संतुलित है, लेकिन फिर भी भाजपा नीत NDA का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।

गिरिजाघरों का समर्थन, सरकार का पलटवार सरकार के खिलाफ अल्पसंख्यक समुदाय की आपत्तियों को दूर करने के लिए कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया के बाद चर्च ऑफ भारत ने भी इस बिल का समर्थन किया है। इससे सरकार को राहत मिली है, क्योंकि विपक्ष इसे “अल्पसंख्यक विरोधी कानून” बताकर निशाना साध रहा था। पिछले साल पेश किए गए इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को सौंपा गया था। हाल ही में JPC की रिपोर्ट आने के बाद, केंद्र सरकार ने कुछ संशोधनों को मंजूरी देकर इसे पेश करने का फैसला लिया है।

सरकार का तर्क: पारदर्शिता लाने का प्रयास सरकार का कहना है कि यह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए लाया गया है। वहीं, विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ बता रहा है। कुल मिलाकर, संसद में इस बिल पर गरमागरम बहस और कड़े विरोध के आसार हैं, लेकिन संख्याबल सरकार के पक्ष में है। अब देखना होगा कि यह विवाद संसद के बाहर सियासी रंग कब तक बनाए रखता है।

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