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क्या वक्फ बिल के जरिए बीजेपी दिखाएगी अपनी ताकत? आज लोकसभा में होगी अहम बहस

वक्फ संशोधन विधेयक 2025: लोकसभा में पेश होते ही बवाल, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया गया वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 संसद के मौजूदा सत्र का सबसे गर्म मुद्दा बन चुका है। मोदी सरकार के इस प्रस्तावित कानून को लेकर विपक्ष और मुस्लिम संगठनों के एक बड़े वर्ग में नाराजगी है। जहां सरकार इसे वक्फ बोर्ड के प्रबंधन में सुधार और पारदर्शिता लाने का कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला करार दे रहा है।

लोकसभा में सियासी घमासान

भाजपा को लोकसभा में बहुमत से 32 सीटों की कमी है, लेकिन एनडीए गठबंधन के सहारे वह इसे आसानी से पास करा सकती है। हालांकि, विपक्ष इस बिल को जल्दबाजी में पारित करने के खिलाफ है और ज्यादा चर्चा की मांग कर रहा है। संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस हो रही है, जहां सत्तारूढ़ दल इसे सुधारात्मक कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष संविधान विरोधी करार दे रहा है।

8 घंटे की चर्चा पर सहमति, विपक्ष का वॉकआउट

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) ने इस विधेयक पर 8 घंटे की चर्चा के लिए सहमति दी है। हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने अधिक समय की मांग की थी और मणिपुर मुद्दे व पहचान पत्र विवाद पर भी चर्चा कराने की बात कही थी। जब उनकी मांग नहीं मानी गई तो विपक्षी दलों ने बैठक से वॉकआउट कर दिया।

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025: क्या है इसमें खास?

यह विधेयक वक्फ अधिनियम में 40 बड़े संशोधन प्रस्तावित करता है। इसमें मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई है। इसके अलावा, वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह विधेयक 2006 की सच्चर समिति की सिफारिशों पर आधारित है और इससे वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाया जाएगा। दूसरी ओर, विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर कुठाराघात कर सकता है और इसे और गहन जांच की जरूरत है।

वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के 10 बड़े अपडेट

🔹 विधेयक पर सियासी संग्राम – 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया गया वक्फ संशोधन विधेयक, विपक्ष और सरकार के बीच तकरार का मुख्य मुद्दा बन गया है।
🔹 40 संशोधनों का प्रस्ताव – इसमें मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में जगह देने के साथ प्रबंधन सुधारों की बात कही गई है।
🔹 सच्चर समिति की सिफारिशों पर आधारित – सरकार का कहना है कि यह विधेयक 2006 की राजिंदर सच्चर समिति की रिपोर्ट के सुझावों पर आधारित है।
🔹 विपक्ष की नाराजगी – कांग्रेस और अन्य दलों ने इस विधेयक को जल्दबाजी में लाने का आरोप लगाया और इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बताया।
🔹 बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक – लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की अध्यक्षता में हुई बैठक में 8 घंटे की चर्चा तय की गई, लेकिन विपक्ष ज्यादा समय चाहता था।
🔹 JPC की रिपोर्ट पेश – संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने इसे संशोधित कर पेश किया, जिसमें नाम बदलकर “Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency, and Development Act” करने की सिफारिश की गई।
🔹 JDU का समर्थन – एनडीए की सहयोगी JDU ने इस विधेयक का समर्थन करने का ऐलान किया है।
🔹 व्हिप जारी – कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने सांसदों को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
🔹 विपक्ष की रणनीति – विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध करने की रणनीति बनाई है।
🔹 दिल्ली में सुरक्षा सख्त – वक्फ बिल को लेकर किसी भी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

क्या होगा आगे?

अब देखना यह है कि संसद में सरकार और विपक्ष के बीच यह जंग क्या मोड़ लेती है। क्या यह बिल आसानी से पास होगा, या फिर मुस्लिम समुदाय और विपक्ष के दबाव में सरकार को पीछे हटना पड़ेगा? संसद के इस सत्र का सबसे बड़ा सियासी घमासान यहीं से शुरू होता दिख रहा है।

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