
शुक्रवार को विपक्षी दलों ने मणिपुर में लगातार जारी हिंसा को रोकने में नाकाम रहने को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि वो जल्द से जल्द हिंसा-ग्रस्त मणिपुर का दौरा करें और वहां कानून-व्यवस्था को ठीक करने में मदद करें। विपक्ष ने यह भी मांग की कि हिंसा की पूरी तरह जांच हो और इस पर संसद में एक श्वेत पत्र (White Paper) पेश किया जाए। विपक्ष ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को भी मणिपुर की बिगड़ी हालत के लिए ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि राज्य में चुनावी प्रक्रिया बहाल होनी चाहिए। उनका कहना था कि राष्ट्रपति शासन इसका हल नहीं है। राज्यसभा में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को लेकर लाए गए वैधानिक प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वो खुद मणिपुर जाएं, वहां के हालात को समझें और स्थिति को सामान्य करें।
खड़गे ने कहा कि मोदी सरकार के पास मणिपुर में बहुमत होते हुए भी वह राज्य को सही ढंग से संभाल नहीं पाई। उन्होंने कहा, “लगभग दो साल से मणिपुर जल रहा है और सरकार हिंसा रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की “डबल इंजन सरकार” ने राज्य में स्थिरता का वादा किया था, लेकिन इसके बदले खून-खराबा, बंटवारा और आर्थिक संकट थमा दिया। खड़गे ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री से अपील करता हूँ कि वे मणिपुर जाएं, पीड़ित लोगों से मिलें, उनकी तकलीफों को समझें और राज्य में कानून-व्यवस्था को ठीक करें।” कांग्रेस नेता ने मणिपुर में हुई हिंसा की गहराई से जांच कराने और इस मुद्दे पर संसद में श्वेत पत्र पेश करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को देश को एक शांति का संदेश देना चाहिए। “जब आपके शासन में एक राज्य जल रहा है, तब आप मूकदर्शक नहीं बने रह सकते,” उन्होंने सरकार से भावुक अपील की। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि पिछले दो सालों में मणिपुर में 260 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है, कई परिवार उजड़ चुके हैं और हज़ारों धार्मिक स्थल तबाह कर दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि 2023 से अब तक मणिपुर में 4,700 से ज़्यादा घर जलाए जा चुके हैं और करीब 13,000 ढांचे — जिनमें स्कूल, अस्पताल और पूजा स्थल शामिल हैं — पूरी तरह नष्ट कर दिए गए हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री पर यह कहते हुए निशाना साधा कि उन्होंने अब तक मणिपुर का दौरा नहीं किया, और केंद्र से मांग की कि राज्य में चुनावी प्रक्रिया को जल्द दोबारा शुरू किया जाए। डीएमके की सांसद कनिमोझी एनवीएन सोमू ने कहा कि राष्ट्रपति शासन कोई समाधान नहीं है बल्कि यह एक बहाना और संघीय ढांचे पर सीधा हमला है। टीएमसी की सागरिका घोष ने प्रधानमंत्री से शांति का कोई प्रतीकात्मक कदम उठाने की मांग की। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी कहा कि प्रधानमंत्री को राज्य का दौरा कर वहां की कानून-व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया को फिर से बहाल करवाना चाहिए। आईयूएमएल के अब्दुल वहाब, सीपीआई के संतोश कुमार पी, आरजेडी के संजय यादव और टीएमसी के डेरेक ओ’ब्रायन ने भी इस पर अपनी बात रखी।



